रविवार, 30 अगस्त 2026

यूपी में पेयजल की गुणवत्ता जांच में जुड़ेंगे माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषक विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का तेजी से कराया जा रहा निर्माण

 

Time india news 11 


 लखनऊ   प्रदेश में ग्रामीण पेयजल की गुणवत्ता जांच व्यवस्था को और अधिक उन्नत एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। जल निगम (ग्रामीण) द्वारा विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका कार्य तेजी से पूर्ण कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। नई स्टेट लैब में अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक सुविधाओं के साथ पेयजल में उभरते प्रदूषक (इमरजिंग कंटेमिनेंट्स) जैसे माइक्रोप्लास्टिक या पीएफएएस की जांच क्षमता विकसित करने की योजना है।
*पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने मौजूदा स्टेट लैब का किया था निरीक्षण*
हाल ही में उत्तर प्रदेश के दौरे के दौरान भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की मौजूदा स्टेट लैबोरेटरी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्रदेश में उपलब्ध जल गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं, उन्नत उपकरणों तथा भविष्य में विकसित की जाने वाली परीक्षण क्षमताओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान सचिव, DDWS द्वारा माइक्रोप्लास्टिक तथा पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच की सुविधा भी स्टेट लैब स्तर पर विकसित किए जाने पर जोर दिया गया।
*प्रदेश में व्यापक जल गुणवत्ता प्रयोगशाला नेटवर्क*
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल गुणवत्ता की निगरानी एवं परीक्षण के लिए बहुस्तरीय प्रयोगशाला नेटवर्क कार्यरत है। इसमें 1 स्टेट या राज्य स्तरीय,  3 क्षेत्रीय , 72 जिला स्तरीय  प्रयोगशालएं तथा 62 जल शोधक संयंत्र प्रयोगशालाएं हैं। राज्य स्तरीय प्रयोगशालाओं में में उन्नत स्तर की परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा इसके 50 मानक एनएबीएल प्रमाणित हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है।
*माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस दो अलग श्रेणियों के प्रदूषक*
माइक्रोप्लास्टिक और पीएफएएस को एक ही पदार्थ मानना तकनीकी रूप से सही नहीं है। माइक्रोप्लास्टिक सामान्यतः 5 मिमी से छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है, जबकि पीएफएएस फ्लोरीन युक्त कृत्रिम रसायनों का एक व्यापक समूह है, जिन्हें पर्यावरण में अत्यधिक स्थायित्व के कारण इसे फॉरएवर कैमिकल कहा जाता है। दोनों की नमूना परीक्षण तथा तकनीकि जांचें अलग-अलग होती हैं।
*कैसे होगी माइक्रोप्लास्टिक की जांच*
माइक्रोप्लास्टिक परीक्षण में प्रदूषक मुक्त सैंपलिंग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नमूने को इस प्रकार एकत्र एवं संभाला जाता है कि नमूने इकट्ठा करने का फ्लास्क या बर्तन, वातावरण, कपड़ों अथवा प्रयोगशाला सामग्री से बाहरी प्लास्टिक कण नमूने में न मिलें। इसके बाद जल शोधन एवं आवश्यक नूमने परीक्षण के माध्यम से कणों को अलग किया जाता है। माइक्रोस्कोपित परीक्षण से सैंपल या नमूनों में संदिग्ध कणों की संख्या, आकार, आकृति और रंग जैसी विशेषताओं का आकलन किया जा सकता है, जबकि पॉलीमर की पुष्ट पहचान के लिए एफटीआरआर या रमन माइक्रोस्कोपी जैसी स्पेकट्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।

*बीआईएस मानकों एवं* जल जीवन मिशन के प्रोटोकॉल के अनुरूप पेयजल गुणवत्ता निगरानी*
जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी निर्धारित राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तथा लागू भारतीय मानकों के अनुरूप की जाती है। प्रयोगशालाओं के साथ-साथ ग्राम स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं/जल गुणवत्ता निगरानी समूहों द्वारा फील्ड टेस्टिंग किट से प्रारंभिक निगरानी की व्यवस्था भी इस प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आवश्यकता एवं निर्धारित परीक्षण कार्यक्रम के अनुसार नमूनों को प्रयोगशालाओं में भेजकर विस्तृत जांच की जाती है।
*भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के लिए तैयार होगी नई स्टेट लैब*
नई स्टेट लैबोरेटरी को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से लैस करने का उद्देश्य प्रदेश में एक मजबूत राज्य रेफरल, आधुनिक रेफरल प्रयोगशाला की क्षमता विकसित करना है। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे प्रदूषक की परीक्षण सुविधा विकसित होने से भविष्य में बेसलाइन डाटा तैयार करने, संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान, वैज्ञानिक निगरानी तथा राष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने वाले मानकों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी।
*तीव्र गति से पूर्ण कराया जाएगा निर्माण : प्रबंध निदेशक*

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि नई स्टेट लैबोरेटरी भवन का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है और इसे विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्टेट लैब की उन्नत परीक्षण क्षमता से जल निगम के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार अन्य सरकारी विभागों एवं संस्थाओं को भी उच्च स्तरीय जल परीक्षण में सहयोग मिल सकेगा। माइक्रोप्लास्टिक एवं पीएफएएस जैसे उभरते प्रदूषकों की जांच को विकसित करना, भविष्य की जल गुणवत्ता चुनौतियों के दृष्टिगत एक महत्वपूर्ण पहल है।



नसीम खान

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शनिवार, 29 अगस्त 2026

बहराइच में माँ पीताम्बरा ब्रेन, स्पाइन एंड ट्रॉमा सेंटर का शुभारंभ 27 अगस्त 2026 को हुआ है, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के रोगों के इलाज के लिए एक नई चिकित्सा सुविधा है।

 


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बहराइच यह सेंटर जाने-माने न्यूरोसर्जन डॉ. शिवम मदेशिया (MBBS, MS, MCh) के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है।



बहराइच लगभग चार महीने पहले सुनील एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे। दुर्घटना के बाद उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी और शरीर का कोई भी अंग ठीक से कार्य नहीं कर रहा था। परिवार के सामने निराशा और चिंता का कठिन दौर था माँ पीताम्बरा ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर में विशेषज्ञ न्यूरोसर्जिकल देखभाल, उचित उपचार एवं सतत प्रयासों के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। यह केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और सेवा का परिणाम है। 
हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि सुनील जी पूर्ण रूप से स्वस्थ हों और अपने परिवार के साथ सुखद एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत करें। ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का इलाज ब्रेन ट्यूमर और स्पाइन ट्यूमर की सर्जरीसिर की गंभीर चोट (हेड इंजरी) और रीढ़ की हड्डी की समस्याए 24 घंटे आपातकालीन (इमरजेंसी) और ट्रॉमा सेवाएं 

नसीम खान पत्रकार

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शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

बहराइच जिले में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और उपलब्धि बिना चीरा लगाए दिल का छेद बंद किया गया

 


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बहराइच जिले के लिए चिकित्सा क्षेत्र में यह एक बहुत बड़ी और सराहनीय उपलब्धि है। बिना चीरा लगाए (Non-surgical/Percutaneous device closure) दिल का छेद बंद करना एक अत्याधुनिक तकनीक है, जो अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही है 27 अगस्त 2026 शहर में स्थित बिटाना एण्ड चन्द्रावती हॉस्पिटल मल्हीपुर रोड बहराइच के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ मोहम्मद यूनुस डी एम (कार्डियोलॉजी) के नेतृत्व में एक 28 वर्ष के लड़के के दिल के छेद को बिना चीरा लगाए बंद किया गया यह आपरेशन बहराइच में अपने तरह का पहला आपरेशन था जोकि आयुष्मान कार्ड से किया गया, मरीज का एक भी पैसा नहीं लगा


इस सम्बन्ध में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ “डॉ मोहम्मद यूनुस” डी एम (कार्डियोलॉजी) से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह एक बड़ी ही जटिल प्रक्रिया है इसमें एक छाता नुमा बटन होता है जिसे मरीज के पैर के माध्यम से छेद तक पहुंचा जाता है और फिर उस छेद के ऊपर रखकर उसे बंद कर जाता है अभी तक बहराइच जैसे छोटे शहर में इस तरह की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थी मगर अब अब “बिटाना एण्ड चन्द्रावती हॉस्पिटल” मल्हीपुर रोड बहराइच में दिल के सभी रोगों का इलाज बहुत की सस्ते दर पर उपलब्ध है या जिनके पास आयुष्मान कार्ड है वो पूरी तरह निःशुल्क इलाज प्राप्त कर सकते है 

Naseem khan

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बुधवार, 26 अगस्त 2026

बहराइच महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क चिकित्सालय, बहराइच के अस्थि रोग विभाग ने मंडल में पहली बार शोल्डर आथ्रोस्कोपी (दूरबीन विधि द्वारा कंधे का सफल ऑपरेशन)


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बहराइच महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क चिकित्सालय, बहराइच ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्थि रोग (हड्डी रोग) विभाग द्वारा मण्डल में पहली बार अत्याधुनिक दूरबीन विधि (शोल्डर आथ्रोस्कोपी) के माध्यम से कंधे के जोड़ की बैंकर्ट रिपेयर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। लंबे समय से कंधे के जोड़ की गंभीर समस्या से पीड़ित 38 वर्षीय एक मरीज का आधुनिक आथ्रोस्कोपी तकनीक द्वारा सफल ऑपरेशन किया गया। मरीज के नाम एवं अन्य व्यक्तिगत विवरण गोपनीयता की दृष्टि से सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं। अस्थि रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. (प्रो.) मिथिलेश कुमार ने बताया कि मरीज कंधे के जोड़ की बैंकर्ट चोट से ग्रसित था। इस प्रकार की चोट में कंधे का जोड़ बार-बार अपनी जगह से खिसकने अथवा अस्थिर होने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। मरीज की स्थिति को देखते हुए अत्याधुनिक शोल्डर आर्थ्राेस्कोपी तकनीक के माध्यम से बैंकर्ट रिपेयर सर्जरी की गई। उन्होंने बताया कि दूरबीन विधि से की जाने वाली इस सर्जरी में छोटे-छोटे छिद्रों के माध्यम से कैमरा एवं विशेष उपकरणों का उपयोग कर कंधे के जोड़ के अंदर की चोट का उपचार किया जाता है। यह आधुनिक तकनीक मरीजों को बेहतर एवं उन्नत उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस जटिल एवं सफल ऑपरेशन में डॉ. प्रो. मिथिलेश कुमार के साथ अस्थि रोग विभाग की टीम एवं अन्य सहयोगी स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. आशीष ने ऑपरेशन के दौरान आवश्यक सहयोग प्रदान किया। ऑपरेशन के उपरांत मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

Naseem khan



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सोमवार, 24 अगस्त 2026

नवागत प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कार्यभार ग्रहण किया, ग्रामीणों को नियमित पेयजल आपूर्ति पर जोर

 


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 लखनऊ  उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के नवागत प्रबंध निदेशक श्री योगेश कुमार ने सोमवार को कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ विभागीय योजनाओं एवं जल जीवन मिशन की प्रगति की जानकारी ली और ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ, सुरक्षित एवं नियमित पेयजल पहुंचाने को अपनी प्राथमिकता बताया।

प्रबंध निदेशक ने कहा कि जल निगम (ग्रामीण) ने गांवों में पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। अब जरूरत इस बात की है कि उपलब्ध कराए गए पेयजल कनेक्शनों के साथ ग्रामीण परिवारों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा निर्धारित समयसीमा में लक्ष्यों को पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के उद्देश्यों को जमीन पर प्रभावी रूप से साकार करने के लिए योजनाओं की लगातार निगरानी, विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और जनशिकायतों का समयबद्ध समाधान जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पेयजल से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का तत्काल संज्ञान लेते हुए उनके निस्तारण में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।

श्री योगेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर से जुड़ी है। इसलिए निगम की प्राथमिकता केवल योजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी संचालन सुनिश्चित करते हुए ग्रामीणों को सुचारु पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना भी है।

उन्होंने अधिकारियों एवं आमजन से प्राप्त शिकायत और सुझावों को गंभीरता से लेने और त्वरित कार्रवाई करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल निगम (ग्रामीण) टीम भावना और बेहतर समन्वय के साथ कार्य करते हुए ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को और मजबूती से आगे बढ़ाएगा।

Naseem khan



रविवार, 23 अगस्त 2026

नवनियुक्त थानाध्यक्ष दिवाकर तिवारी के नेतृत्व में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 वारंटी को गिरफ्तार किया

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बहराइच जिले के रामगांव थाने की पुलिस ने 'ऑपरेशन वारंटियों की बारात' के तहत एक ही रात में 20 वांछित वारंटियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने चोरी के मामलों में वांछित शहबुद्दीन और मुन्ना सहित सभी आरोपियों को बस में बैठाकर अदालत में पेश किया SP विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देश पर रामगांव थानाध्यक्ष दिवाकर तिवारी के नेतृत्व में टीम ने अपराध एंव अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस दौरान 20 आरोपितों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय रवाना किया।,,,,,,,थानाध्यक्ष  तिवारी ने बताया कि गठित भिन्न-भिन्न पुलिस टीमों द्वारा न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी अधिपत्र के क्रम में संभावित स्थानों पर दबिश दी गई। विभिन्न प्रकरणों में 18 वारंटियों को हिरासत पुलिस लिया गया। इसमें तारापुर खुर्द निवासी सहाबुद्दीन व मुन्ना समेत अन्य की गिरफ्तारी के समय सर्वोच्च न्यायालय व मानवाधिकार आयोग के आदेशों व निर्देशों का अक्षरशः पालन किया गया। पुलिस टीम में थानाध्यक्ष के अलावा चौकी प्रभारी राणा राज सिंह,चौकी इंचार्ज हेमन्त सिंह,चौकी इंचार्ज मेटकहा नंद किशोर सिंह,उपनिरीक्षक हरी राम यादव,रचना सिंह,हेड कांस्टेबल सत्यानन्द यादव,सुरेंद्र कुमार वर्मा,रणधीर मौर्या,दीपक यादव,विष्णु प्रताप सिंह,इन्द्रेश यादव, आशुतोष प्रजापति, सोनू यादव, कृष्ण कुमार चौधरी, अंकित सिंह, बादल सिंह,महिला आरक्षी रंजना, प्रतिमा प्रजापति, विभा तिवारी, रिंकी आदि शामिल रहे।,,,,,,


Naseem khan

शनिवार, 22 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश:ग्रामीण पेयजल योजनाओं को समयबद्ध पूरा करने के लिए सरकार ने काम तेज कर दिया है।

 


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यूपी:22 अगस्त 2026 तक प्रदेश के 20 जिलों में जल निगम (ग्रामीण) की कुल 203 योजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनमें रायबरेली में सबसे अधिक 44 योजनाएं, बलिया में 30 योजनाएं और प्रतापगढ़ में 27 योजनाएं शामिल हैं।

निर्माणाधीन 203 योजनाओं की प्रगति की बात करें तो 49 योजनाएं 50 प्रतिशत तक, 96 योजनाएं 51 से 75 प्रतिशत तथा 58 योजनाएं 75 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं। योजनाओं की वर्तमान प्रगति के आधार पर अधिकारियों को अधिकांश जिलों की शेष योजनाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, रायबरेली और बलिया की शेष योजनाओं के लिए 30 नवंबर 2026 की समयसीमा निर्धारित की गई है। योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए कार्यों की लगातार निगरानी और प्रगति के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।

*5 नवनिर्मित खंड कार्यालयों की कार्य-तैयारी की भी समीक्षा*

बैठक में जल निगम (ग्रामीण) के नवनिर्मित 5 खंड कार्यालयों—संभल, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, एटा और हमीरपुर—की कार्य-तैयारी को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही निर्माणाधीन योजनाओं के लक्ष्य, योजना से वंचित गांवों को प्राथमिकता, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा आर्सेनिक एवं फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई जैसे विषयों पर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

*आर्सेनिक प्रभावित 574 गांवों में कार्य पूरा*

ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आर्सेनिक, फ्लोराइड और जेई/एईएस प्रभावित गांवों में किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई।

प्रदेश में कुल 738 आर्सेनिक प्रभावित गांवों में 574 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके बाद 164 गांवों में कार्य शेष है, जिसे 30 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी प्रकार 1,460 फ्लोराइड प्रभावित गांवों में 963 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है। अब 497 गांवों में कार्य शेष है। इन गांवों में भी 30 सितंबर तक पेयजल योजनाओं का निर्माणकार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

जेई/एईएस प्रभावित 821 गांवों में कार्य पूरा

जेई/एईएस प्रभावित क्षेत्रों में भी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 1,146 जेई/एईएस प्रभावित गांवों में 821 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष गांवों में भी 30 सितंबर तक पेयजल योजनाओं का निर्माणकार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में दूषित पाए गए पानी के नमूनों पर आवश्यक रेमेडियल एक्शन को तत्काल पूरा करने तथा योजना पूर्ण होने तक संबंधित क्षेत्रों में डायरेक्ट पंपिंग के माध्यम से नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

*समयबद्ध पूर्णता से और मजबूत होगी ग्रामीण पेयजल व्यवस्था*

जल निगम (ग्रामीण) की ओर से निर्माणाधीन योजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने, गुणवत्ता प्रभावित गांवों में आवश्यक कार्यों को गति देने और योजना से वंचित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

203 निर्माणाधीन योजनाओं के साथ-साथ आर्सेनिक, फ्लोराइड और जेई/एईएस प्रभावित गांवों में चल रहे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने से ग्रामीण क्षेत्रों में **हर घर नल से जल** की व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। विभाग का फोकस निर्माण कार्यों की गति के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

Naseem khan

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