बहराइच:शरद पूर्णिमा: स्वास्थ्य और चंद्र ऊर्जा का दिव्य संगम – आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व

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टाइम इंडिया न्यूज 11 यूपी बहराइच 


 आज शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे देश में चंद्रमा की उज्ज्वल किरणों के बीच खीर का सेवन और ध्यान का विशेष महत्व बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार यह दिन न केवल धार्मिक रूप से बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी माना गया है।

आयुर्वेद में शरद ऋतु का संबंध

आयुर्वेद में वर्ष को छह ऋतुओं में बाँटा गया है, जिनमें शरद ऋतु (लगभग आश्विन–कार्तिक मास) का विशेष स्थान है। इस ऋतु में पित्त दोष का प्रकोप बढ़ता है। सूर्य की तीव्रता कम होने लगती है और वातावरण शुष्क व शीतल होने लगता है। ऐसे में शरीर में संचित पित्त का शमन करने के लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त होता है।
शरद पूर्णिमा की रात्रि और चंद्र किरणों का प्रभाव

आयुर्वेदिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत तुल्य मानी गई हैं। इस रात चंद्रमा पूर्ण शक्ति के साथ पृथ्वी पर शीतलता और औषधीय ऊर्जा का संचार करता है। चंद्र किरणों के स्पर्श से शरीर के पित्त और मानसिक तनाव दोनों का शमन होता है।

खीर का सेवन क्यों किया जाता है?

आयुर्वेद में इस दिन चांदनी में रखी खीर को सेवन करने की परंपरा का गहरा वैज्ञानिक आधार है।
रात्रि में चंद्र किरणों में रखी खीर में प्राकृतिक शीतलता, कैल्शियम और प्राण ऊर्जा का संचार होता है। इससे पित्त दोष शांत होता है, नींद में सुधार होता है, त्वचा में चमक आती है और मन प्रसन्न रहता है।
आयुर्वेदाचार्यों की राय

डॉ. मनीष कुमार शर्मा बताते हैं

 “शरद पूर्णिमा की रात शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का अद्भुत अवसर है। इस दिन चंद्र किरणों में ध्यान, प्राणायाम और खीर का सेवन करने से पित्त शमन के साथ-साथ मानसिक शांति और ओज की वृद्धि होती है।”

स्वास्थ्य के लिए सुझाव

 शरद पूर्णिमा की रात्रि में खुले आकाश के नीचे बैठकर चंद्र दर्शन व ध्यान करें।
 गुनगुना दूध, खीर, सत्ववर्धक फल व शीतल आहार ग्रहण करें।
मसालेदार, तले हुए और गर्म प्रकृति वाले आहार से बचें।
 अगली सुबह त्रिफला या गुलाब जल युक्त जल से स्नान करना लाभकारी माना गया है।
शरद पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्राकृतिक चिकित्सा का एक दिव्य अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के चक्र के साथ तालमेल बनाकर चलना ही सच्चा स्वास्थ्य है — यही आयुर्वेद का सार है।

डॉ. मनीष कुमार शर्मा
असिस्टेंट प्रोफेसर,क्रिया शारीर विभाग
डॉ. सर्वेश कुमार शुक्ला आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, बहराइच,उत्तर प्रदेश

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