बहराइच के महाराजा सुहेलदेव राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक अद्भुत और जीवनरक्षक कारनामा कर दिखाया है।


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मेडिकल कॉलेज बहराइच की असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर हर्षिता श्रीवास्तव ने कर दिखाया ऐसा कार्य जिससे बहराइच में चारो तरफ हो रही चर्चा लोग कर रहे  डाक्टर हो तो हर्षिता श्रीवास्तव जैसी बहराइच महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विशेषज्ञ (डाॅ हर्षिता श्रीवास्तव ) की टीम का अद्भुत कारनामा : 21 सप्ताह के अति-दुर्लभ 'पेट के गर्भ' से बचाई 24 वर्षीया महिला की जान, गर्भाशय भी सुरक्षित रखा
बहराइच। महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क चिकित्सालय, बहराइच के आपातकालीन स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBGY) विभाग की टीम ने एक अत्यंत जटिल, दुर्लभ और जीवन-घातक मामले का सफलतापूर्वक प्रबंधन कर नया कीर्तिमान रचा है। टीम ने 21 सप्ताह के 'इंट्रा-एब्डोमिनल एक्टोपिक प्रेगनेंसी' (पेट के भीतर गर्भधारण) से पीड़ित 24 वर्षीय महिला की न केवल जान बचाई, बल्कि उसकी भावी प्रजनन क्षमता को ध्यान में रखते हुए गर्भाशय (Uterus) को भी सुरक्षित बचा लिया।
क्या था जटिल मामला?
मरीज़ का पूर्व में एक सिजेरियन ऑपरेशन (LSCS) हो चुका था और उसमें गर्भस्थ शिशु की मृत्यु (IUD) हो चुकी थी। इस बेहद दुर्लभ मामले में भ्रूण गर्भाशय के बाहर पेट में पल रहा था और गर्भनाल (Placenta) पिछले सिजेरियन के निशान (Scar) पर चिपकी हुई थी। इसके साथ ही महिला गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी। ऐसे मामलों में जानलेवा आंतरिक रक्तस्राव का भारी ख़तरा रहता है और सामान्यतः गर्भाशय को निकालना



 (Hysterectomy) ही एकमात्र विकल्प माना जाता है।
सटीक निर्णय और उत्कृष्ट सर्जिकल कौशल
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन टीम ने बिना समय गंवाए त्वरित और सटीक फ़ैसला लिया। महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के उत्कृष्ट सर्जिकल कौशल और सावधानीपूर्वक किए गए ऑपरेशन के बल पर महिला का गर्भाशय सफलतापूर्वक बचा लिया गया। वर्तमान में मरीज़ की स्थिति पूरी तरह स्थिर और ख़तरे से बाहर है।टीम भावना का अनुकरणीय उदाहरण यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि बेहतर समन्वय, पूर्व-तैयारी और नैदानिक उत्कृष्टता (Clinical Excellence) से कठिन से कठिन आपातकालीन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।इस जटिल सर्जरी और मरीज़ की जान बचाने में आपातकालीन टीम के मुख्य चिकित्सकों—डॉ. हर्षिता (सहायक प्रोफेसर, OBGY), डॉ. रितु (सीनियर रेजिडेंट, OBGY), और डॉ. हिले (सीनियर रेजिडेंट, एनेस्थीसिया) के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ, ब्लड बैंक और ओटी (OT) कर्मियों का विशेष और सराहनीय योगदान रहा।


Naseem khan





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