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यूपी:22 अगस्त 2026 तक प्रदेश के 20 जिलों में जल निगम (ग्रामीण) की कुल 203 योजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनमें रायबरेली में सबसे अधिक 44 योजनाएं, बलिया में 30 योजनाएं और प्रतापगढ़ में 27 योजनाएं शामिल हैं।
निर्माणाधीन 203 योजनाओं की प्रगति की बात करें तो 49 योजनाएं 50 प्रतिशत तक, 96 योजनाएं 51 से 75 प्रतिशत तथा 58 योजनाएं 75 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं। योजनाओं की वर्तमान प्रगति के आधार पर अधिकारियों को अधिकांश जिलों की शेष योजनाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, रायबरेली और बलिया की शेष योजनाओं के लिए 30 नवंबर 2026 की समयसीमा निर्धारित की गई है। योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए कार्यों की लगातार निगरानी और प्रगति के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
*5 नवनिर्मित खंड कार्यालयों की कार्य-तैयारी की भी समीक्षा*
बैठक में जल निगम (ग्रामीण) के नवनिर्मित 5 खंड कार्यालयों—संभल, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, एटा और हमीरपुर—की कार्य-तैयारी को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही निर्माणाधीन योजनाओं के लक्ष्य, योजना से वंचित गांवों को प्राथमिकता, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा आर्सेनिक एवं फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई जैसे विषयों पर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
*आर्सेनिक प्रभावित 574 गांवों में कार्य पूरा*
ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आर्सेनिक, फ्लोराइड और जेई/एईएस प्रभावित गांवों में किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई।
प्रदेश में कुल 738 आर्सेनिक प्रभावित गांवों में 574 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके बाद 164 गांवों में कार्य शेष है, जिसे 30 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी प्रकार 1,460 फ्लोराइड प्रभावित गांवों में 963 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है। अब 497 गांवों में कार्य शेष है। इन गांवों में भी 30 सितंबर तक पेयजल योजनाओं का निर्माणकार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जेई/एईएस प्रभावित 821 गांवों में कार्य पूरा
जेई/एईएस प्रभावित क्षेत्रों में भी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के 1,146 जेई/एईएस प्रभावित गांवों में 821 गांवों में कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष गांवों में भी 30 सितंबर तक पेयजल योजनाओं का निर्माणकार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में दूषित पाए गए पानी के नमूनों पर आवश्यक रेमेडियल एक्शन को तत्काल पूरा करने तथा योजना पूर्ण होने तक संबंधित क्षेत्रों में डायरेक्ट पंपिंग के माध्यम से नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
*समयबद्ध पूर्णता से और मजबूत होगी ग्रामीण पेयजल व्यवस्था*
जल निगम (ग्रामीण) की ओर से निर्माणाधीन योजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने, गुणवत्ता प्रभावित गांवों में आवश्यक कार्यों को गति देने और योजना से वंचित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
203 निर्माणाधीन योजनाओं के साथ-साथ आर्सेनिक, फ्लोराइड और जेई/एईएस प्रभावित गांवों में चल रहे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने से ग्रामीण क्षेत्रों में **हर घर नल से जल** की व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। विभाग का फोकस निर्माण कार्यों की गति के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।


