बहराइच महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (बहराइच मेडिकल कॉलेज) के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि

 


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बहराइच के महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं महर्षि बालार्क चिकित्सालय ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग ने पहली बार अत्याधुनिक दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) तकनीक का इस्तेमाल कर एक मरीज का सफल ऑपरेशन किया है
लखीमपुर की रहने वाली 27 वर्षीय ऋचा मिश्रा काफी समय से गॉलब्लैडर (पित्ताशय) में पथरी की समस्या से जूझ रही थीं। दर्द से परेशान ऋचा जब बहराइच मेडिकल कॉलेज पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने नई तकनीक से उनका इलाज करने का फैसला किया सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव और उनकी अनुभवी टीम ने अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए यह जटिल ऑपरेशन सफलता पूर्वक पूरा किया। डॉ. अमित श्रीवास्तव (सर्जरी विशेषज्ञ)"लैप्रोस्कोपिक तकनीक में मरीज को बड़ा चीरा लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे मरीज को दर्द कम होता है, इन्फेक्शन का खतरा ना के बराबर रहता है और रिकवरी बहुत तेज़ होती है। मरीज को कम समय में ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। अब हमारे यहाँ इस विधि से अपेंडिक्स, हर्निया और गर्भाशय से जुड़े ऑपरेशन भी आसानी से किए जा रहे हैं।इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को अंजाम देने में डॉ. अमित श्रीवास्तव के साथ डॉ. राहुल, डॉ. बृजेश, डॉ. दिवाकर और डॉ. राजदीप ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. आशीष और डॉ. हिले का विशेष सहयोग रहा। डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद मरीज ऋचा मिश्रा की स्थिति पूरी तरह से स्थिर है और उनके स्वास्थ्य में तेज़ी से सुधार हो रहा है।इस बड़ी उपलब्धि पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. (प्रो.) संजय खत्री ने पूरी सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीम को बधाई दी प्रधानाचार्य डॉ. (प्रो.) संजय खत्री "यह हमारे संस्थान के लिए गर्व का क्षण है। भविष्य में भी बहराइच मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य

Naseem khan

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