बहराइच:विश्व मधुमेह दिवस 2024: थीम, इतिहास और रोगियों के लिए सर्वोत्तम

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टाइम इंडिया न्यूड 11यूपी बहराइच 

बहराइच। बृहस्पतिवार को सीएमओ कार्यालय समेत जनपद की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर विश्व मधुमेह दिवस गोष्ठी, निःशुल्क जांच शिविर, हस्ताक्षर अभियान के जरिये जन जागरूकता फैलाकर मनाया गया। इस बार विश्व मधुमेह दिवस की थीम ब्रेकिंग बैरियर, ब्रिजिंग गैप रही। सीएमओ कार्यालय सभागार में हुई गोष्ठी कार्यक्रम में सीएमओ डॉ० संजय कुमार ने कहा कि इंटरनेशनल डायबिटीज फाउंडेशन द्वारा 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस तय किया गया है। 1991 से इसे वैश्विक दिन के रूप में यूएन से पहचान मिली और सबको यह समझ आने लगा कि यह एक काफी गंभीर बीमारी है। 'वर्ल्ड डायबिटीज डे' का उद्देश्य डायबिटीज और उसके बचाव के प्रति जागरूकता फैलाना  है। मधुमेह के रोगी का ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित न होने के कारण हृदय रोगियों व किडनी के रोगी बढ़ते जा रहे हैं जो गंभीर है। उन्होंने कहा कि जीवन शैली में परिवर्तन, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से मधुमेह को कन्ट्रोल किया जा सकता है। एनसीडी क्लीनिक के डॉ० अंशुमान सिंह श्रीनेत्र ने कहा कि हर साल ‘वर्ल्ड डायबिटीज डे’ 14 नवंबर को सर फ्रेडरिक बेंटिंग की जन्म तिथि पर मनाया जाता है। सर फ्रेडरिक बेंटिंग ने चार्ल्स हरबर्ट के साथ मिल कर इंसुलिन हार्मोन की खोज की थी। आज लगभग 463 मिलियन लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं। लगभग 90 फीसदी डायबिटीज के मरीजों को टाइप-2 डायबिटीज है। इतनी तेजी से डायबिटीज के बढ़ते केस व्यक्ति की समय से पहले मृत्यु का कारण हैं इसलिए इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना काफी ज़रूरी है। डॉ० अंशुमान की अगुवाई में जिला चिकित्सालय में एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर मरीजों की उच्च रक्तचाप, कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों की जांच एवं परामर्श भी दिया गया। साथ ही हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। उन्होंने कहा कि मधुमेह से बचाव और इलाज के लिए गेहूं के साथ चने, ज्वार, जौ, जई और दालों से बने आटे का प्रयोग करें, सब्जियों में तोरी, टिंडा, पालक, परवल, खीरा, ककड़ी और करेले का प्रयोग नियमित रूप से करें। अमरूद, जामुन, पपीते जैसे फलों का प्रयोग भी डायबिटीज में लाभकारी होता है। अंकुरित दालों और अनाज का प्रयोग भी शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। उन्होंने आगे कहा कि डायबिटीज एक तरह का मेटाबोलिक डिसऑर्डर होता है। इस बीमारी के बारे में शिक्षा के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा सकती है। इसलिए कुछ डायटरी बदलावों और नियमित रूप से एक्सरसाइज करके व्यक्ति अपने आप को इस बीमारी के रिस्क से बाहर ला सकता है। जिला स्वास्थ्य सूचना शिक्षा अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि जनपद में विश्व मधुमेह दिवस पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न माध्यमों से जागरूकता फैलाने का कार्य किया जा रहा है। मधुमेह होने के संभावित कारणों में पारिवारिक इतिहास, गलत खानपान, निष्क्रिय जीवनशैली या अत्यधिक वजन को ही माना जाता है लेकिन मधुमेह के संभावित कारणों में प्रदूषण भी एक सक्रिय कारक हो सकता है। यह पहले से पीडि़त रोगियों की मुश्किलों को जोखिम भरा बना सकता है। इसका कारण वातावरण में घुले वे सूक्ष्म कण हैं जो कई महत्वपूर्ण अंगो जैसे- पैंक्रियाज, फेफड़े व आंखों आदि को नुकसान पंहुचाकर रोग की जटिलता को बढ़ाते हैं। इस मौके पर  अपर मुख्य चिकित्साधिकारी राजेश गौतम, अप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ० पी० के० बांदिल, डॉ० संतोष राणा, जेरियाट्रिक विभाग के डॉ० परितोष तिवारी, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ० विजित जायसवाल, डॉ० रियाजुल हक, एफएलसी विवेक श्रीवास्तव, मोहम्मद हारून, फहीम अहमद, बृज प्रकाश, पुनीत शर्मा, स्वाती श्रीवास्तव, संतोष सिंह, मुकेश हंस, मनीष कुमार समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि एवं स्वास्थ्य वर्कर मौजूद रहे।

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