जनपद बलिया में तैनात खण्ड विकास अधिकारी निलंबित उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
शासनादेश के अनुसार जांच में यह तथ्य परिलक्षित हुआ कि संबंधित अधिकारी द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम-2013 (POSH Act) के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है, जो कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 के नियमों के भी विपरीत है। इसके आधार पर उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही भी प्रस्तावित की गई है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के संरक्षण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा महिला उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, कर्तव्यहीनता या अनुशासनहीनता जैसी शिकायतें सही पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में कार्यरत प्रत्येक महिला कर्मचारी को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर भय, उत्पीड़न अथवा अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने समस्त विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के नेतृत्व में प्रदेश ही नहीं अपितु देश में डबल इंजन सरकार सुशासन, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक शुचिता के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनुचित आचरण को किसी भी स्थिति में संरक्षण नहीं दिया जाएगा।,,,,,,,,

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